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Product Description
About The Product:
तसनीम ख़ान की ये कहानियाँ परिवार, समाज और राजनीति के अलग-अलग आयामों की गहरी पड़ताल और उनमें अंतर्निहित आख्यान को दर्ज करने की मुसलसल कोशिशों से उपजी हैं। कहानियों के परिवेश और भाषा में वर्णित संस्कृति को स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है; अर्थात यह संसार कथाओं में बड़े विश्वसनीय ढंग से आया है। धर्म, स्त्री और पारिवारिक जीवन के जटिल अंतरसंबंधों को गहरी सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ कहती यह कहानियाँ अपने आप स्त्री के दुख और सांप्रदायिकता की बढ़ती विषबेल की पहचान करती चलती हैं। शीर्षक कहानी 'बावलिस्तान' मौजूदा भारतीय राजनीति और मीडिया के खोखले चरित्र को एक दिलचस्प स्थिति के सहारे नुमायाँ करती है तो वहीं ' अब्दुल की मौत' भी मौत के बाद की काल्पनिक परिस्थिति में सांप्रदायिकता की समस्या का परीक्षण करती है। कहानियों में गहरी रागात्मकता है, बोली का सुंदर रचाव है और स्पष्ट राजनैतिक समझ है ।
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