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Product Description
About The Product:
प्राचीन काल में आर्यावर्त की पुण्यधरा पर आध्यात्मिक सिद्धान्तों के साथ-साथ वैज्ञानिक तथ्यों को स्थापित करने की परम्परा रही है। इस परम्परा के संवर्द्धन एवं परिपोषण में अनगिनत ऋषियों, विचारकों, संतों, महात्माओं, मनीषियों एवं वैज्ञानिकों का सराहनीय तथा उत्साहवर्धक योगदान रहा है। सभ्यता और संस्कृति का विकास साथ-साथ होता है। सभ्यता भौतिक संसार को सम्पन्नता प्रदान करती है तो संस्कृति मानवीय चेतना को प्रबुद्ध करती है। सभ्यता का चक्र विज्ञान और प्रौद्योगिकी के सहारे आगे बढ़ता है जबकि संस्कृति का चक्र साहित्य और अभिव्यक्ति के सहारे। परन्तु दोनों का चक्र गणितीय अनुशासन से ही गतिशील होते है। अतः गणित-बोध के बिना सभ्यता और संस्कृति का विकास सम्भव नहीं है।Dr. Manoranjan Kumar singh, Gajendra Pratap Singh & Jitendra Kumar Tiwari
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